इश्क !

  

              इश्क !

 साहब इश्क तो वह नशा है ।

 जो दारू से भी देर तक चलता है।

  दारु तो इंसान छुड़ा भी लेता है ।

 पर इश्क तो शादी में भी तब्दील

  होता है।

   लेखक :-  आकाश राय

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